जेजेएमपी के सबजोनल कमांडर ने इंसास रायफल के साथ किया सरेंडर

पलामू : पुलिस दबाव और संगठन की उपेक्षा से प्रभावित उग्रवादी संगठन जेजेएमपी (झारखंड जनमुक्ति परिषद) के सब जोनल कमांडर भवानी जी उर्फ भवानी भुईयां उर्फ भागीरथी राम ने रविवार को सरेंडर कर दिया। भवानी ने इंसास रायफल के साथ पलामू रेंज के डीआईजी राजकुमार लकड़ा, उपायुक्त शशि रंजन, एसपी चंदन कुमार सिन्हा, सहायक पुलिस अधीक्षक सह एसडीपीओ के. विजय शंकर सहित अन्य पुलिस पदाधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया। मौके पर पलामू के उपायुक्त शशि रंजन ने झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुर्नवास नीति के तहत भवानी भुइयां को 1 लाख रूपये का चैक सौंपा। साथ ही चार डिसमिल जमीन, स्वरोजगार से जोड़ने, बच्चों की पढ़ाई और परिवार को सुरक्षा का भरोसा दिलाया। भवानी भुइयां जिले के रामगढ़ थाना क्षेत्र के हुटार टोला के उडरीटांड़ का रहने वाला है। भवानी उर्फ भागीरथ भुईंया, महेश भुइयां के इनकाउंटर में मारे जाने और रामसुंदर राम की हत्या के बाद सबजोनल कमांडर बना था। भवानी पांच बड़ी घटनाओं को अंजाम का आरोपी है।

डीआईजी ने कहा कि उग्रवादियों के उन्मूलन हेतु लगातार कार्यवाई की जा रही है। उग्रवादियों के मांद में सघन अभियान चलाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुर्नवास नीति का प्रचार-प्रसार कर सरेंडर करने के लिए प्र्रेरित किया जा रहा है। इसी से प्रभावित होकर जेजेएमपी सब जोनल कमांडर ने सरेंडर किया। उसे सारी सुविधाएं दी जायेंगी। उम्मीद है भवानी से प्रेरित होकर अन्य नक्सली और उग्रवादी समाज की मुख्यधारा में लौटेंगे।

एसपी चंदन कुमार सिन्हा ने कहा कि भवानी को लेकर पुलिस की दबिश तेज थी। परिवार से पुलिसिया पूछताछ से भवानी घबराया हुआ था। करीब डेढ़ महीने पहले उसने एसडीपीओ के. विजय शंकर एवं रामगढ़ थाना प्रभारी प्रभात रंजन राय से संपर्क कर परिवार से पूछताछ नहीं करने की अपील की। यही से उसके सरेंडर करने को लेकर मोटेवेट करने का सिलसिला शुरू हुआ। एसपी ने कहा कि माओवादी हो या जेजेएमपी कोई अपने कैडर को छोड़ना नहीं चाहता। लगातार पुलिस के प्रति भ्रम की स्थिति बनाए रखता है। गलतफहमी पैदा करता है, ताकि संगठन को छोड़कर कोई भागे नहीं। लेकिन अपराध और उग्रवाद की जिंदगी बड़ी नहीं होती है

हथियार के अलावा गोलियां भी सौंपा

सब जोनल कमांडर भवानी ने हथियार के अलावा इंसास राइफल की तीन मैग्जीन, इंसास की ही 83 चक्र गोलियां, एक एच.ई. 36 ग्रेनेड, कैंपिग इक्यूपमैंट, जे.जे.एम.पी. का लेटरहेड, गोली रखने के दो पाउच आदि सौंपे हैं।

नक्सलियों के दबाव एवं अभाव में चुना गलत रास्ता

भवानी भुइयां उर्फ भागीरथी भुइयां के बचपन में ही उसके माता-पिता की मौत बीमारी से हो गयी थी। पालन पोषण बड़े भाई ने किया। गाय-बैल चराने का काम करता था। कभी स्कूल नहीं गया। इनके तीनों भाई खेती बाड़ी एवं मजदूरी का काम करते हैं. बचपन घोर गरीबी में गुजरा। घर घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र एवं जंगल क्षेत्र में होने के कारण गांव में जब-तब नक्सली आया करते थे और युवकों को पार्टी में शामिल होने के लिए दबाव डालते थे। आर्थिक तंगी होने के कारण एवं गांव में कोई रोजगार का साधन ना होने के कारण भवानी ने पार्टी में शामिल होने का मन बनाया।

पहले टीपीसी फिर जेजेएमपी से जुड़ा

टीपीसी (तृतीय प्रस्तुतीकरण समिति) के रोशन जी से संपर्क कर भवानी वर्ष 2016 में इस संगठन से जुड़ा था। लगभग सात महीने रोशन जी के दस्ते में शामिल रहा। बाद में टीपीसी के ही सूरज जी उर्फ आकाश जी के द्वारा भवानी को जे.जे.एम.पी. शामिल होने के लिए समझाया। भवानी महेन्द्र कोरबा, सूरज जी के साथ अपना हथियार लेकर जे.जे.एम.पी. के जोनल कमांडर सुशील उरांव एवं सब जोनल कमांडर महेश भुइयां की टीम में शामिल हो गया. वर्ष 2017 के अक्टूबर माह में छुट्टी लेकर घर आया। इसी क्रम में पुलिस द्वारा आर्म्स के साथ पकड़कर जेल भेज दिया गया।

2020 में बना गढ़वा का एरिया कमांडर

जुलाई 2020 को सब जोनल कमांडर महेश भुइयां भवानी को एरिया कमांडर (गढ़वा) बनाया। इसके दस्ता में अनिल भुइयां उर्फ जयप्रकाश, संजय लोहरा, विजय भुइयां, उदय पासवान, माला उरांव, विशाल चौधरी, अमरेश सिंह उर्फ बूटन थे. ए.के. 47, इंसास, एस.एल.आर., .303 राइफल एवं 315 राइफल दस्ते में थे। दस्ते का काम क्षेत्र के ठेकेदारों, व्यवसायियों तथा ईंटा-भट्ठा मालिकों को डरा धमकाकर कर लेवी वसूलना था।सितंबर 2020 में महेश भुइयां के कहने पर भवानी ने जलमिनार बना रहे भंडरिया निवासी अमजद खान से 150000 लेवी की मांग की गई थी। वर्ष 2021 के माह अगस्त में रामसुंदर जी की आपसी गुठभेड़ में मौत हो जाने के बाद भवानी को पलामू-गढ़वा एरिया का सब-जोनल कमांडर बना दिया गया। लातेहार के नावाडीह में जे.जे.एम.पी. के साथ मुठभेड़ में डीएसपी के शहीद होने के बाद पूरे क्षेत्र में पुलिस के द्वारा छापामारी अभियान चलाया जाने लगा, जिसकी वजह से भवानी अपने रिश्तेदार के यहां शरण ले लिए हुए था और लगातार सरेंडर के लिए सोच रहा था।

जेजेएमपी में शामिल हैं 40 लोग

भवानी ने बताया कि जेजेएमपी में 40 लोग शामिल हैं। पप्पू लोहरा सुप्रीमो है। संगठन में एके56 सहित बड़े हथियार हैं। लेवी के पैसे में 50-50 प्रतिशत की भागीदारी संगठन और उसके दस्ते के बीच होती थी। जेल जाने के बाद केस लड़ने के लिए पैसे नहीं जुटा पा रहा था। संगठन का साथ भी पूरी तरह से नहीं मिलता था। पुलिस की दबिश बढ़ी हुई थी। नतीजा उसने सरेंडर का रास्ता चुना।

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