इस वर्ष 2023 में कब है जीवित्पुत्रिका (जीतिया) व्रत, क्या कहते हैं पंचाग और क्या कहते हैं हमारे गरुड़ महाराज?

जीवित्पुत्रिका (जीतिया) व्रत को लेकर हमेशा से ही भ्रांतियां रही हैं। यही भ्रांतियां इस व्रत को दो दिनों में बांट देती हैं। जो पंचागों/कैलेंडरों पर विश्वास रखते हैं। वे पंचाग व कैलेंडर के अनुसार व्रत को रखते हैं और जो शास्त्रों को माननेवाले हैं, वे शास्त्रों को प्रमुख स्थान देते हैं। ऐसे भी जिन्होंने व्रत को लेकर वरदान दिया हैं, जिन्होंने व्रत के बारे में स्वयं दिशा-निर्देश दिये हैं, उनकी बातों को नजरंदाज करना कदापि सही नहीं हैं, फिर भी लोग नजरंदाज करते हैं तो उन्हें क्या कहा जाये। आइये हम दोनों बातों को आपके सामने रखते हैं, आप स्वयं निर्णय करें, क्या सही हैं या क्या गलत ?

काशी या अन्यत्र स्थानों से निकलनेवाले पंचांगों/कैलेंडरों पर दृष्टि डालें तो उनके अनुसार जीवित्पुत्रिका (जीतिया) व्रत 6 अक्टूबर को है और इसका पारण दूसरे दिन यानी 7 अक्टूबर को पूर्वाह्न 10 बजकर 21 मिनट के बाद है। लेकिन शास्त्र क्या कहते हैं? जीवित्पुत्रिका व्रत की शास्त्रोक्त कथा के अनुसार, गरुड़ महाराज जीमूतवाहन से कहते हैं कि वे संसार के कल्याणार्थ एक और वर देना चाहते हैं। आज आश्विन कृष्ण सप्तमी रहित शुभ अष्टमी तिथि है। आज ही तुमने प्रजा को जीवनदान दिया है। हे वत्स अब यह दिन ब्रह्म भाव को प्राप्त हो गया है।

अपरं च वरं दास्ये लोकानां हितकाम्यया। आश्विने बहुले पक्षे तिथिश्चाद्याष्टमी शुभा।।
सप्तमीरहिता चाSद्य प्रजानां जीवितोSसि त्वम्। अतोSयं वासरो वत्स ब्रह्मभावं गमिष्यति।।


आगे गरुड़ कहते हैं कि हे महाभाग सप्तमी से रहित और उदयातिथि की अष्टमी को व्रत करे, यानी सप्तमी विद्ध अष्टमी जिस दिन हो, उस दिन व्रत न कर शुद्ध अष्टमी को व्रत करे और नवमी में पारण करें। यदि इस पर ध्यान न दिया गया तो फल नष्ट हो जायेगा और सौभाग्य तो अवश्य ही नष्ट हो जायेगा।

उपोष्य चाष्टमीं राजन् सप्तमी रहिता शिवा। यस्यामुदयते भानुः पारणं नवमीदिने।।
वर्जनीया प्रयत्नेन सप्तमीसहिताष्टमी। अन्यथा फलहानिः स्यात् सौभाग्यं नश्यति ध्रुवम्।।


ऐसे में जिन्होंने स्वयं वरदान दिया है। जिन्होंने जीमूतवाहन के समक्ष स्पष्ट शब्दों में अपनी बातों को रखा है। उनकी बातों को नजरंदाज करना मूर्खता के सिवा कुछ दूसरा हो ही नहीं सकता। इसलिए पंचाग/कैलेण्डर की बातों को यहां स्वीकार करना न्यायोचित नहीं हैं, जो गरुड़ कहें, वही सही हैं।

उनके अनुसार जिस अष्टमी में सूर्योदय हो, वहीं ग्राह्य है। उसी दिन व्रत करना श्रेयस्कर है, न कि सप्तमीयुक्त अष्टमी के दिन व्रत करना। सच्चाई यही है कि अगर आप 6 अक्टूबर को व्रत रखते हैं तो उस दिन सप्तमीयुक्त अष्टमी है और 7 अक्टूबर को व्रत रखते हैं तो उस दिन शुद्ध अष्टमी है जो गरुड़ महाराज के अनुसार सत्य व सिद्ध है। इसलिए अब आप के उपर है कि आप किस दिन व्रत रखते हैं।

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