ओलचिली लिपि के समर्थन में खुलकर सामने आया संथाल सामाज

जमशेदपुर: 6 मई 2023 : उपायुक्त कार्यालय पूर्वी सिंहभूम के समक्ष पारंपरिक माझी परगना महाल, पूर्वी सिंहभूम के नेतृत्व में समाजिक संगठनों ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन करते हुए उपायुक्त के माध्यम से राज्यपाल , मुख्यमंत्री झारखंड सरकार, निदेशक जेसीईआरटी रांची झारखंड, डायरेक्टर, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग झारखंड सरकार के नाम मांग पत्र सौंपा।

मौके पर उपस्थित देश परगाना बाबा बैजू मुर्मू ने कहा कि निदेशक जेसीईआरटी रांची झारखंड द्वारा विगत दिनों नई शिक्षा नीति 2020 के तहत क्षेत्रीय भाषा में पठन-पाठन हेतु कक्षा तीसरा से पांचवीं तक का गणित एवं पर्यावरण विषय का पाठ्यपुस्तक के लिए एक शिक्षकों का दल गठित किया था, गठित शिक्षक दल ने संथाली भाषा के लिए ओलचिकी लिपि का प्रयोग करते हुए पठन-पाठन सामग्री तैयार कर विभाग को दिया। मगर दुर्भाग्य से जेसीआरटी निदेशक में सामग्री को अस्वीकार करते हुए पुन: देवनागरी लिपि में छपने के लिए शिक्षकों को बुलाया और ओलचिकी लिपि में तैयार करने वाले शिक्षकों को शो कॉज नोटिस जारी किया।

तत्पश्चात हम लोगों ने राज्य के मुख्यमंत्री माननीय हेमंत सोरेन जी से औपचारिक मुलाकात की थी और माननीय ने आश्वासन दिया था की संथाली भाषा के लिए ओलचिकी लिपि का ही प्रयोग किया जाएगा, मगर दुख की बात है शिक्षा विभाग के सचिव मुख्यमंत्री से मिलने वाले प्रतिनिधि दल से मिलने के लिए एक बैठक सुनिश्चित करती है और अंतिम क्षण में बैठक को स्थगित करते हुए हमें पुन: बैठक आयोजन कर सूचित करने के बात कह कर मामले को लटकाने का कोशिश करते हैं। हमने पुनः विभाग को चिट्ठी लिखकर बैठक आयोजित करने के लिए आवेदन दिया है , अगर 1 सप्ताह के अंदर बैठक आयोजित करते हुए समस्या का समाधान नहीं किया तो आदिवासी संथाल समाज दुमका से कोल्हान तक रोड रास्ता में निकलेंगे और झारखंड में केजी से पीजी तक संथाली भाषा के लिए ओलचिकी लिपि का व्यवहार करने, पुस्तक अनुवाद एवं मुद्रित करने, सांथाली एकेडमी एकेडमी का गठन करने, पद सृजित करते हुए संथाली ओल चिकी शिक्षकों की बहाली करते हुए प्राथमिक से विश्वविद्यालय तक पढ़ाई शुरू करने तथा भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल संथाली भाषा को झारखंड राज्य में प्रथम राजभाषा का दर्जा देने के लिए बाध्य करने के लिए बृहद सर पर एक और हूल का आगाज किया जाएगा।

साथ ही विगत दिन समाचार पत्र के माध्यम से ज्ञात हुआ कि परसुडीह थाना क्षेत्र को नगर परिषद के रूप में घोषित किया जाएगा जिसका विरोध में उपायुक्त के माध्यम से राज्यपाल व मुख्यमंत्री को भी अवगत किया गया की परसुडीह थाना क्षेत्र पांचवी अनुसूची क्षेत्र में आता है, और यहां नगर पालिका नगर निकाय नगर परिषद का गठन करना संविधान के अनुच्छेद 243 (z) c के तहतअसंवैधानिक है। इसीलिए पांचवी अनुसूची क्षेत्रों में अवैध रूप से गठित नगर निगम, नगर पालिका , नगर पंचायत एवं नगर परिषद को अविलंब रद्द करें एवं ऐसा किसी भी तरह असंवैधानिक कार्य को करने की कल्पना भी ना करें।


ज्ञापन सौंपने के अवसर पर मुख्य रूप से तोरोप पारगना दसमत हांसदा, हरिपोदो मुर्मू, पुंता मुर्मू , सुशील हसदा, आसेका अध्यक्ष सुबोध मंडी, आसेका महासचिव शंकर सोरेन, माझी बाबा दुर्गा चरण मुर्मू, रमेश मुर्मू, दीपक मुर्मू,मानसिंह सोरेन, सुखराम किसकू, सुरेंद्र टुडू, बिरसिंह बास्के मधु सोरेन, इत्यादि काफी संख्या में समाज के माझी बाबा एवं ग्रामीण उपस्थित थे।

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