रांची : झारखंड में डायन-बिसाही बहुत बड़ी समस्या है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव आदिवासी बहुल इलाकों में देखने को मिलता है। डायन-बिसाही से सबसे ज्यादा प्रभावित झारखंड रहता है। डायन बिसाही मामले में राज्य में अब तक सैकडो लोगो की जान चुकी है।
झारखंड पुलिस की ओर से राज्य के जिलो के थाना क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों में पोस्टर लगाकर डायन-बिसाही के खिलाफ जानकारी देकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। गांवों, पंचायतों में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। पुलीस का मकसद है की समाज में अंधविश्वास पर अंकुश लगने के साथ-साथ आमलोग जागरूक हो सके।
21वीं सदी में भी ग्रामीण क्षेत्रों में अशिक्षा के कारण अंधविश्वास में पड़कर मरीज को ईलाज के बजाय ओझा-गुणी के चक्कर में पड़कर एक-दूसरे के साथ मारपीट व हत्या तक अंजाम देने से बाज नहीं आते हैं। उसमें ज्यादातर महिलाओं को प्रताड़ित होना पड़ रहा है।
डायन-बिसाही से जुड़े मामलों में ज्यादातर हत्या निजी स्वार्थ की वजह से की जाती है। जिनमें पारिवारिक विवाद और जमीन हड़पने की नीयत प्रमुख है। डायन-बिसाही मामले में हत्या की एक और वजह सामने है। जिसमें गांव में किसी के बीमार होने पर इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराने की जगह लोग तांत्रिक और ओझा-गुणी के पास पहुंच जाते है और उसके इशारे पर भी हत्या की घटना को अंजाम दिया जाता है।