आयोजन में रांची के कई धार्मिक, सामाजिक संस्थाओ के सदस्यो का महाराज जी द्वारा किया जा रहा अभिनंदन, स्वागत

दिव्य आध्यात्मिक प्रवचन का पंचम दिवस

रांची : चिल्ड्रन पार्क, कडरू में आज पाँचवे दिन दिव्य आध्यात्मिक प्रवचन एवं मधुर संकीर्तन का भव्य आयोजन राधा गोविन्द धाम, रांची के सानिध्य आरती के बाद प्रसाद का वितरण किया गया। इस अवसर पर मंच पर कई लोगों ने महाराज जी को पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन और स्वागत किया।


महाराज जी कहते है दुख का कारण संसार:
हम हमेशा सवाल करते हैं कि संसार में दुख क्यों मिलता है?
इसके जवाब में स्वामी जी ने बड़ी सटीक उपमा दी। वह कहते हैं कि जैसे संसार में बच्चा खिलौने में व्यस्त हो जाता है, अपनी माँ को भुला जाता है। तब माँ बच्चे का खिलौना छिन्न लेती है, फिर बच्चे को अपनी माँ का ख्याल आता है। ऐसे ही जब भगवान हमारे ५ प्रकार के खिलौने (इंद्रियों के विषय) छिन्न लेते हैं, जब हमें दुख मिलता है, तब जाकर हमें भगवान का स्मरण होता है।


आप मालिक अपने मन के:
अधिकांश लोग मानते हैं कि उनका मन उनके वश में नहीं है। यह वाक्य बिल्कुल गलत है। देखिए स्वामी जी पुनः बहुत अच्छी मिसाल देते हैं। उन्होंने कहा जब आपका बॉस आपको फटकार लगाता है, तब आप चुपचाप उसकी बात सुनते जाते हैं। क्यों क्योंकि अगर आपने कुछ बोला तो आपकी नौकरी चली जाएगी। फिर वह गुस्सा आप अपनी पत्नी पर उतारते हैं, पत्नी बच्चे पर और बच्चा फिर अपने पालतू कुत्ते पर निकालता है। इसका सारांश यह हुआ कि हम कभी भी अपने से ऊपर वाले व्यक्ति पर गुस्सा या आक्रोश नहीं निकालते। क्योंकि ऐसा करने से हमारा नुकसान हो सकता है।


श्रीकृष्ण द्वारा बुद्धि योग का उपयोग सर्वश्रेष्ठ:
स्वामी जी ने सिद्ध कर दिया इस उदहारण से की हम अपने मन पर नियंत्रण पा सकते हैं। बस यही पावर का हमें इस्तेमाल करना है। जैसे भगवान श्रीकृष्ण द्वारा बताए गए ‘कर्म योग’ का पालन अर्जुन ने सहर्ष किया। भगवद्गीता में भगवान ने अधिकांश लोगों के कल्याण के लिए ‘कर्म योग’ का मार्ग बताया। लेकिन श्रीकृष्ण के अनुसार ‘भक्ति’, ‘ज्ञान’ और ‘कर्म’ से बड़ा ‘बुद्धि योग’ है। बुद्धि योग का प्रयोग करके आप बार बार अपनी बुद्धि से तत्वज्ञान को पक्का करें। और अपनी बुद्धि से मन पर नियंत्रण साधे और उसको अपने लक्ष्य को पूरा करने में इस्तेमाल करें। क्योंकि वेदों के अनुसार हमारी इंद्रियाँ मन के अधीन हैं, मन बुद्धि के और बुद्धि आत्मा के अंतर्गत है। पर माया ने आत्मा (जीव) स्वरूप ही हमें भुलवा दिया है।


कल के कार्यक्रम की सूचना देते हुए आयोजन समिति के प्रमोद सारस्वत ने बताया कि कल कल सुबह स्वामी जी हम सबको कथा स्थल में प्रातः 7:30 बजे ‘रूपध्यान’ करना सिखाएँगे, जो जगद्गुरु कृपालु जी महाराज द्वारा भक्ति साधना का ‘प्राण’ है। इस ध्यान के लिए आप समय पर उपस्थित होकर ‘राधारानी’ एवं ‘श्यामसुंदर’ के प्रति अपने प्रेम का विस्तार करें और भक्ति साधना में आगे बढ़ते जाएं।
कल महाराज श्री उड़ीसा के लिए 3:00 बजे हटिया से प्रस्थान करेंगे जो भी भक्तजन महाराज श्री का अभिनंदन स्वागत करना चाहते हैं वह कृपया हटिया स्टेशन पहुंचकर महाराज श्री का स्वागत अवश्य करे।


आयोजन को सफल बनाने में महेंद्र शर्मा ,शैलेंश सिंह, प्रमोद सारस्वत,कपिल देव गिरी, अशोक आचार्य, किशोर मिश्रा, प्रमोद कुमार पांडेय, डॉ अभिषेक सिंह, मीनाक्षी नेत्रालय, ,रामाकांत जेना ,भरत अग्रवाल ,एनसी गुप्ता ,नकुल नायक सहित काफी संख्या में लोग लगे हुए हैं।
इस अवसर पर राधे गोविंद जुगल सरकार की आरती केसाथलोगों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया

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