ज्ञान यदि शेरनी का दूध है तो उसके लिए बुद्धि रूपी बर्तन भी सोने का होना चाहिए।


रॉची: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय सेवा केन्द्र चौधरी बगान, हरमू रोड,
राँची में सरस्वती पूजा के शुभ अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में दीप प्रज्वलन करने के बाद हुण्डई मोटर्स के अमरजीत जी ने कहा कि सरस्वती पवित्रता की देवी है क्योंकि ज्ञान यदि शेरनी का दूध है तो उसके लिए बुद्धि रूपी बर्तन भी सोने का होना चाहिए। इसी गुण के महत्वस्वरूप विद्यार्थी ब्रह्माचर्य में रहकर विद्या अध्ययन करते हैं। देवी सरस्वती आजन्म ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए एकव्रता और एकनामी का दृढ़ संकल्प धारण किए हुए ज्ञान दान करती रहीं हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित नीति सिन्हा समाजसेवी ने कहा कि सरस्वती माता के हाथ में दिखाई गई सितार ईश्वरीय ज्ञान का प्रतीक है, सफेद वस्त्र पवित्रता के प्रतीक हैं, हाथ में पुस्तक सर्व की भाग्यनिर्मात्री होने का प्रतीक है। माला निरंतर ईश्वरीय स्मृति की प्रतीक है, हंसवाहन नीर-क्षीर विवेकी होने का प्रतीक है तथा विभिन्न आभूषण विभिन्न दिव्य गुणों के प्रतीक हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित अभियंता बालकृष्ण जी ने कहा कि सरस्वती शब्द का शाब्दिक अर्थ है मिठास की देवी सरस्वती देवी ज्ञान और मिठास दोनो से ओतप्रोत है। ज्ञान मीठा तब लगता है जब उससे होने वाली प्राप्तियाँ स्पष्ट सामने दिखाई देती है।

सरस्वती पूजा के आध्यात्मिक रहस्य का उद्घाटन करते हुए केन्द्र संचालिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा जब हम कहते हैं कि हे शारदे माँ, अज्ञानता से हमें तार दे माँ, सिद्ध करती है कि अज्ञानता का नाश करने वाला कोई अन्य ज्ञान है जिसके लिए संसार तरस रहा है। परमपिता परमात्मा शिव कलियुग के अन्त और सतयुग के आरंभ के बीच के समय में अवतरित होकर ब्रह्मा मुख से जो सत्य ईश्वरीय ज्ञान देते हैं उसे सम्पूर्ण रूप से धारण करने वाली सरस्वती, ब्रह्मा की प्रथम मुख रचना, इस ज्ञान को विश्व में बांटती है।

ऐसा सर्व प्राप्तियों करने वाला, भण्डारे भरपूर करने वाला काल कण्टक दूर करने वाला, विकारों, विकमों, पापों के अंधकार को मिटाने वाला ज्ञान, परमात्मा में धारण कर लेने के कारण जगदम्बा सरस्वती ‘ज्ञान की देवी’ कहलाई। जैसे राष्ट्र को आजादी दिलाने निर्मित महात्मा गांधीजी को राष्ट्रपिता का खिताब लोगों द्वारा मिला। इसी प्रकार, ज्ञान सागर के ज्ञान को पूर्ण रूपेण बुद्धि रूपी शिव द्वारा बुद्धि के गागर समा लेने के कारण ‘ज्ञान की देवी’ यह ख़िताब उन्हें स्वयं परमात्मा द्वारा मिला।

सरस्वती द्वारा ज्ञान दिए जाने जैसे सर्व महत्वपूर्ण कार्य के लिए भी एक निश्चित समय होता है। जब संसार की नैतिक और आध्यात्मिक अधोगति हो जाती है और इसका ऐसा रूप बिगड़ जाता है कि वह पुरुषों और महापुरुषों के द्वारा संभालने की स्थिती में नहीं रहता तो परमपुरुष को हस्तक्षेप करना पड़ता है। परमात्मा द्वारा प्राप्त सहज ज्ञान और सहज राजयोग की शक्ति का धवल प्रकाश माँ सरस्वती चारों कोनों में फैलाती है। वर्तमान वही समय चल रहा है जिसे संगमयुग कहते हैं। इस समय ही सरस्वती का दिव्य कर्तव्य भी गुप्त रूप में चल रहा है।

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