स्वामी विवेकानंद के उपदेश आजादी के भूमिका में भी निर्णायक- कर्मवीर सिंह

राँची: छविराज फाउंडेशन एवं स्वर्णरेखा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन के संयुक्त तत्वाधान में बरियातु स्थित स्वर्णरेखा संस्थान में भाजपा नेता देवराज सिंह के नेतृत्व में स्वामी विवेकानंद जी के स्मृति में युवा संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में भाजपा झारखंड के प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, रामकृष्ण परमहंस आश्रम के भावेशा नंद जी, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रांत संपर्क प्रमुख राजीव कमल बिट्टू, स्वर्णरेखा संस्थान के संस्थापक प्रकाश सिंह एवं सचिव गुंजन झा उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता देवराज सिंह ने किया। संगोष्ठी की शुरुआत सभी अतिथियों ने दीप प्रवजलन कर एवं स्वामी विवेकानंद के तस्वीर पर पुष्पार्पण कर किया। संचालन अमिताभ धीरज एवं धन्यवाद ज्ञापन विद्यासागर ने किया।

संगोष्ठी का विषय नए भारत मे युवाओं का योगदान पर प्रकाश डालते हुए भाजपा झारखण्ड के संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने कहा की, आज के युवाओं को स्वामी विवेकानंद के पदचिन्हों पर चलकर आगे बढ़ना चाहिए, उन्होंने कहा कि, देश को गढ़ने में युवाओं का अहम रोल होता है, उन्होंने कहा कि, युवाओं को किताबें पढ़नी चाहिए, किताबों से ज्ञान अर्जित होता है और उस ज्ञान के माध्यम से ही हम अपने जीवन को सशक्त बना पाते है, उन्होंने कहा कि जब हमारा जीवन सशक्त होगा तो समाज का निर्माण होगा। उन्होंने कहा कि आज के युवा गृहस्थ जीवन को ही सम्पूर्ण जीवन ना माने, उन्हें देश और समाज के बारे में सुनना चाहिए और देश के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि, अपने विचारों और अपने आदर्श मय जीवन के लिए स्वामी विवेकानंद पूरे विश्व में जाने जाते हैं।

युवाओं के भीतर उनके द्वारा प्रज्वलित देश प्रेम और कर्मठता की चिंगारी ने अंततः इस देश की आजादी में भी बड़ा ही निर्णायक योगदान दिया है। आध्यात्मिकता से ओत प्रोत अपने क्रांतिकारी विचारों से उन्होंने तत्कालीन समाज और विशेष रूप से युवाओं को झकझोर दिया। उनके संदेशों में ईश्वर के प्रति निष्ठा ,स्वयं में विश्वास , आपसी भाईचारा और कर्म करने की प्रेरणा मुख्य थे। अपने क्रांतिकारी विचारों से उन्होंने इस समाज को युगांतरकारी परिवर्तन का सूत्र दिया। उनके विचारों से युवाओं को सही दिशा मिल सके।

रामकृष्ण परमहंस आश्रम के सचिव भावेशानंद जी ने कहा जी, स्वामी विवेकानंद ने सदैव जीवन को अग्रसित करने का मार्ग दिखाया है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद को कोट करते हुए कहा कि, एक ऐसा धर्म होना चाहिए जिसमें अपनी विनम्रता के लिए उत्पीड़न या असहिष्णुता के लिए कोई स्थान नहीं हो जिसका पूरा परिक्षेत्र और पूरी शक्ति मानवता को अपने स्वयं के सच्चे दिव्य स्वभाव का एहसास कराने के लिए केंद्रित हो।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रांत संपर्क प्रमुख राजीव कमल बिट्टू ने कहा की, उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का स्पष्ट मत था कि युवा पीढ़ी में ही विषम परिस्थितियों को अनुकूल बनाने की क्षमता होती है, बस उन्हें उनके अंदर छिपी क्षमता का एहसास कराने की आवश्यकता है। वे युवा पीढ़ी के प्रेरणा स्रोत बनकर उनके आदर्श बन गए। स्वामी विवेकानंद ने अपना संपूर्ण जीवन देश से अज्ञानता,अशिक्षा,अस्पृश्यता और अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन के लिए समर्पित कर दिया था। मौके एवं स्वर्णरेखा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन के संस्थापक प्रकाश सिंह एवं सचिव गुणानंद झा ने भी स्वामी विवेकानंद व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।

संगोष्ठी को सफल बनाने में सोनू मिश्रा, संजीव मिश्रा, निपुण पांडेय, प्रवीण कुमार, रितराज प्रजापति, मोहित दुबे, नवेन्दु उपाध्याय, अजय भारती, शुभम मिश्रा समेत अन्य की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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