
रांची – छत्तीसगढ़ के रायपुर में आयोजित ग्लोबल क्वीन ट्राइबल अवार्ड जीत कर आई पूजा लकड़ा का भव्य स्वागत, उराव जनजाति के लोगों ने रेलवे क्वार्टर में निकाली भव्य रैली, परंपरागत रूप से स्वागत किया गया. झारखंड की पूजा लकड़ा ने झारखंड की वेशभूषा और परंपरा को प्रदर्शित करते हुए राज्य का मान बढ़ाया है. रायपुर में आयोजित ग्लोबल क्वीन ट्राइबल अवार्ड अपनें नाम कर वापस लौटी है साथ ही उनका नाम इंटरनेशनल राउंड के लिए सिलेक्ट भी हुआ है. जहां वह 162 देशों के बीच देश के जनजातीय चेहरों का प्रतिनिधित्व करेंगी. इस दौरान आदिवासी समाज के लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया है.

बालों में मोर और मुर्गे के पंख, हाथों में तीर गोदना, गले में सिक्कों की माला, हाथों में पापंरिक कड़ा एंठी पहने हुए बालोद पार्वती कोर्राम नजर आईं। गोंड आदिवासी समुदाय के ताल्लुक रखने वाली इस आदिवासी युवती ने बताया कि हमारे पूर्वज शिकारी रहे, हमारे सुदाय में तीरंदाज गोदना की परंपरा है। हम शरीर पर तीर के गोदना (टैटू) गर्व से बनाते हैं। यही हमारी पहचान है।

इस कार्यक्रम के आयोजक डॉ. चिदत्तमिका खटुआ और दिलीप मोहंती ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य आदिवासी समाज की बेटियों में आत्मविश्वास विश्वास पैदा करना और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देना है। हमारी कोशिश है कि आदिवासी अपने कल्चर को दुनिया के सामने दिखा सकें। इस अवार्ड समारोह के फाइनल मुकाबले में देश के कई जगहों से आदिवासी गेटअप में आयी युवतियों के बीच कई राउंड हुए। जिसके बाद फाइनल विजेता चुना गया। हरियाणा से आयी सुमन हरियाणवी ट्रेडीशन के साथ मंच में उतरी। सुमन ने समाज में लड़कियों के साथ हो रहे भेदभाव के खिलाफ संदेश दिया। झारखंड से आयी पूजा लकड़ा को इस मुकाबले में जीत मिली। 51 हजार का कैश प्राइज भी मिला। अब पूजा अगले राउंड के लिए दिल्ली जाएंगी। जहाँ 162 देशों के बीच इंटरनेशनल लेवल का आयोजन होना है।