
रांची: पोक्सो के विशेष न्यायाधीश आसिफ इकबाल की अदालत ने मंगलवार को नाबालिग से दुष्कर्म करने के दोषी अरविंद सिंह को 20 साल कैद की सजा सुनाई है. साथ ही उसपर 20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है. जुर्माना की राशि नहीं जमा करने पर अभियुक्त को 1 साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी. अभियुक्त पेशे से ऑटो चालक है. उस पर इटकी थाना क्षेत्र की रहनेवाली नाबालिग को अकेला पाकर जंगल में ले जाकर दुष्कर्म करने का आरोप है. पीड़िता 26 फरवरी 2019 को घर लौट रही थी. पीड़िता सिंदवार टिकरा के निकट ऑटो पकड़ी थी. अभियुक्त ने उसे शार्टकट रास्ते से घर पहुंचाने का झांसा देकर सुनसान जगह पर ले गया और जबरदस्ती की. घटना का अंजाम देने के बाद अभियुक्त ने पीड़िता को यह बात किसी को नहीं बताने की धमकी भी दी थी. अगर किसी को बताई तो जान से हाथ धोना पड़ेगा। घर लौटने के बाद पीड़िता ने घटना की जानकारी परिवार को दी. इसके बाद इटकी थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई. सुनवाई के दौरान एपीपी मोहन कुमार ने सात गवाहों को प्रस्तुत किया था. जिसके आधार पर अदालत ने अभियुक्त को दोषी कराते हुए सजा सुनाई है.
पुलिस की सूझ-बूझ से मिला न्याय

कहते हैं ना की अपराधी कितना भी शातिर क्यों ना हो, अगर पुलिस चाहे तो अपराधी ज्यादा दिनों तक सलाखों से दूर नहीं रह सकता. पुलिस की सूझ-बूझ की वाह वाही करते आप नहीं थकेंगे. इस पूरे मामलें में सब इंस्पेक्टर वाहिद अंसारी का नाम सामने आ रहा है जो की तत्काल में चुटिया थाने में पद्स्थापित हैं, जिन्होनें अपने सूझ-बूझ से पूरे मामलें की जाँच पड़ताल की और आपराधियों को नाबालिग से दुष्कर्म के आपराध में सज़ा दिलवाया.
लेकिन इस पूरे मामले में कुछ सवाल सामने आते है की किसी को अरेस्ट करके जेल भेजते हैं तो पुलिस को पुरस्कृत किया जाता है. लेकिन जो सजा दिलवाने का काम करते हैं, क्या उनके लिए भी कुछ पुरस्कृत करने का प्रावधान है या नहीं?