‘मेरा राम की कृपा से सब काम हो रहा है‘ कथावाचक राजन जी महाराज के भजनों पर झूमे भक्त।

फायदा देखकर जीवन में कभी कायदा नहीं बदलना चाहिए-राजन जी महाराज

कथावाचक राजन जी महाराज के भजनों पर झूमे भक्त, ‘मेरा राम की कृपा से सब काम हो रहा है‘ गाया गीत

साधु बना नहीं जा सकता, साधु जन्म से ही साधु होता है-राजन जी महाराज

शरणागति का अर्थ मानसिक शरणागति है – राजन जी महाराज

रांची: हरमू मैदान में चल रहे सप्तदिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के अंतिम दिन कथा का रसपान कराते हुए कथावाचक परमपूज्य राजन जी महाराज ने कहा कि एक-एक सदगुण यदि जीवन में उतारा जाय तो साधारण मनुष्य भी सज्जन बन सकता है। जीवन में कभी शोर मत करें, काम और कर्म ऐसा करें कि संसार में शोर होने लगे। महाराज श्री ने कहा कि कामना करें कि आपके जीवन में कोई न कोई अभाव बना रहे। क्योंकि अभाव में सदा स्वभाव बना रहता है और ईश्वर की याद बनी रहती है। कथा कहती है कि घर से बाहर जाते समय अपने से श्रेष्ठ का आशीर्वाद लेकर निकलें, सब मंगल होगा।

आज की कथा श्रीरामचरितमानस के चैथे कांड किष्कींधाकांड में प्रवेश करती है। महाराज श्री ने कहा किष्कींधाकांड में दोहा 13 से 17 तक चैपाई को पढे। पर्वत पर प्रभु श्रीराम ने प्रकृति का अद्भुत वर्णन किया है। एक एक चैपाई अमृत है। प्रसंग को आगे बढाते हुए महाराज श्री ने कहा कि प्रभु की लीला के कारण रावण पंचवटी से माता का हरण करके लंका ले जाता है। मार्ग में जटाउ ने सीता जी की सूचना दी। यहां श्रीराम ने हनुमान को हृदय से लगाया। महाराज श्री ने हनुमान जी के पावन चरित्र का गुणगान किया। महाराज श्री ने कहा फायदा देखकर जीवन में कभी कायदा नहीं बदलना चाहिए। जीवन में कितना भी बडा लाभ दिख रहा हो और वह यदि अधर्म प्राप्त होनेवाला है तो उससे अच्छा निर्धन बनकर रहा जाय। बाली अधर्ममार्गी है। इसलिए प्रभु ने सुग्रीव से मित्रता की। उन्होंने कहा सुंदरकांड रामचरित मानस के समस्त कांडों में श्रेष्ठ है। सुंदरकाण्ड की शुरूआत किष्किन्धाकाण्ड पर्वत से होती है। प्रसंग को आगे बढाते हुए महाराज श्री ने हनुमान जी के जरिए समुद्र लांघकर लंका पहुंचने की कथा-उपकथाओं का रोचक वर्णन किया।

प्रसंग के बीच में ही मेरा राम की कृपा से सब काम हो रहा है, बरस रही प्रभु की कृपा अपार, कथा श्रवण कर मिट जाती है सौ जनम जनम की व्यथा, है करामात क्या इनके चरणों की रज में जाकर के गौतम किनारे से पूछो, इस दुनिया में सुंदर सुंदर फुल खिलानेवाला भजन सुनकर श्रोता झूम उठे। श्री रामकथा के विश्राम दिवस पर भजन कीर्तन और मंगलगान से पूरा पंडाल गुंजायमान रहा। खचाखच भरे प्रवचन पंडाल में शनिवार को प्रख्यात कथावाचक श्री राजन जी महाराज ने अपनी अद्भुत शैली से कथा कहकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। भगवान राम ने रावण के साथ उसके सारे योद्धाओं, परिजनों व दैत्य को मारकर उनका उद्धार किया। विभीषण को राजतिलक देकर सीता और लक्ष्मण, हनुमान, सुग्रीव, जांबवान, अंगद आदि के साथ अयोध्या आये। अयोध्या में खुशियां मनाई गई। इस दौरान श्रीराम के जयघोष से पूरा पांडाल गूंज उठा।

कथा समाप्ति के उपरांत आयोजन समिति द्वारा महाराज जी का अभिनंदन संस्था की ओर से अंग वस्त्र देकर किया गया।


राजन जी महाराज ने कहा 7 दिनों तक चलने वाली इस कथा के मुख्य यजमान प्रेमचंद श्रीवास्तव व उनका परिवार जिनके अपार सहयोग से कथा संपन्न हो रही है ।
ब्यासपीठ से मैं उनका अभिनंदन स्वागत करता हूं ।
साथ ही साथ आयोजन समिति से जुड़े प्रकाश धेलीया ,मनीष साहू, बसंत शर्मा, प्रमोद सारस्वत, नेमी अग्रवाल, मुकेश काबरा, सजन पाडिया,श्रवन अग्रवाल, दीपक पाठक का भी उन्होंने अभिनंदन और स्वागत व्यासपीठ से किया ।


उन्होंने श्रोताओं को कहा इन 7 दिनों में किसी भी तरह की कोई भी त्रुटि आयोजको की तरफ से हुए हो तो आप मुझे माफ करेंगे ।
पुनः आप लोगों से मिलने की अभिलाषा के संग जरूर आपके बीच रांची आऊंगा ।
इस अवसर पर महाराज श्री के भाई विनय जी तिवारी का भी अंग वस्त्र देकर अभिनंदन स्वागत किया गया। साथ ही साथ गुरुजी के साथ पधारे सारे लोगों का अभिनंदन और स्वागत किया गया।

प्रवक्ता प्रमोद सारस्वत ने मंच से महाराज श्री का आभार ब्यक्त करते कहा भक्ति पूर्ण कथा की अमृत वर्षा का लाभ रांची की जनता को प्राप्त हुआ है।
उन्होंने कहा हमारी राजधानी रांची अद्भुत श्री राम का तीर्थ संगम बन गयी है।
रांची व पूरे झारखंड सहित दूसरे राज्यो से पधारे महाराज के शिष्य अमृत कथा का रसपान करने के लिए पधारे ।
उनको भी आभार जनित धन्यवाद।
श्री सारस्वत ने उपस्थित सभी श्रोताओं को धन्यवाद दिया कि आपके भावपूर्ण श्रद्धा के कार्य संपूर्ण हुआ है आप सभी से धन्यवाद के अधिकारी सामान आप सभी को कोटि-कोटि धन्यवाद आयोजन समिति की तरफ से प्रेषित करता हूं।


श्री सारस्वत ने गुरु जी को
धन्यवाद करते हुए कहा कि आपके भावपूर्ण कथावाचन और भजनों से रांची के एक ही नहीं, असंख्य लोग प्रभावित हुए हैं और प्रभु श्रीराम के पदचिन्हों पर चलने के लिए प्रेरित हुए हैं। इसलिए यह कथा सफल मानी जायेगी। कथा स्थल में उपस्थित हजारों श्रोताओं ने खडे होकर राजन जी महाराज का अभिवादान किया।
कथा स्थल पर मुख्य संयोजक प्रकाश धेलिया, संयोजक मनीश साहू, प्रवक्ता प्रमोद सारस्वत, बसंत शर्मा, नेमीचंद अग्रवाल, आनंद माणिक, मुकेश काबरा, सज्जन पडिया, दीपक पाठक, श्रवण अग्रवाल, राजू यादव सहित काफी संख्या में सदस्य अपनी सेवा दी।

  • आयोजन समिति के मुख्य यजमान प्रेमचंद श्रीवास्तव मुख्य संयोजक प्रकाश धेलिया, प्रवक्ता प्रमोद सारस्वत ने रांची के समस्त धार्मिक और सामाजिक संस्थ , दैनिक यजमान के प्रति भी आभार प्रगट किया।एवम कहा तन मन धन से सेवा देने वाले लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा आयोजन से जुड़ी सभी लोगों का जिसमें रांची के हरमू सोसाइटी बोर्ड, बिजली विभाग, रांची टेंट हाउस,बिजली,साउंड, नागरमल मोदी सेवा सदन ,सदर अस्पताल, मारवाड़ी युवा मंच, दिल्ली से पधारे चरण पादुका के लोग, रांची नगर निगम प्रशासन,नर सेवा नारायण सेवा ,प्रशाशन और पत्रकार सभी लोगों को कार्यक्रम की सफलता के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।
    गुरुजी रांची से गढ़वा के लिए प्रस्थान किए हैं कल से नौ दिवसीय श्री राम कथा झारखंड के गढ़वा में होगी।
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